Saturday, November 3, 2007

6.चूहे का सूट

–नवीन चतुर्वेदी

सर्दी पडी बहुत, चूहे ने
अपना सूट सिलाया।
दो कतरन ऊनी कपडे की
चार रेशमी लाया।
दर्जी बोला–‘‘समय नहीं है,
कहीं और तुम जाओ,
और किसी छोटे दर्जी से
अपना सूट सिलाओ।‘‘
अपने पैने दांत दिखा
जब चूहे ने धमकाया
नाप लिया फौरन चूहे का
मन ही मन घबराया।

5. जाडे का सूरज

नवीन चतुर्वेदी

जाडे के मारे सूरज ने
ओढ लिया कुहरा।
मुर्गे ने जब बांग लगाई
सूरज बन गया बहरा।
आठ बजे के बाद दिखाया
उसने अपना चेहरा
और शाम के छह बजते ही
भागा, फिर ना ठहरा।



4-मैराथन दौड

–नवीन चतुर्वेदी

थी मैराथन दौड
सभी प्रतियोगी थे तैयार।
चीता था तैयार
और थे घोडे भी तैयार।
ऊंट सधा बैठा,
बैठा था, सिंह फुलाए सीना।
चूहा भी था एक ट्रैक पर
नाम था जिसका टीना।
गणपति जी की कथा याद थी
खुश था मन ही मन।
होते ही संकेत,
सभी प्रतियोगी दौड पडे थे।
केवल चूहे राम
वहीं पर अडे खडे थे।
खडा देख निर्णायक को
दौडे चूहे राम
चक्कर सात लगाए उसके
चूहे ने अविराम,
किन्तु गया बेकार सभी
मैराथन जीता घोडा
तब चूहे ने पत्थर से
अपना ही सिर फोड़ा।

3.गोला फेंक

–नवीन चतुर्वेदी

गोला फेंक दिया
फिर अप्पू जी ने सबसे दूर
बाघ और भालू जी भूले
अपना सभी गरूर।

2. हाथी का पाजामा

–नवीन चतुर्वेदी

हाथी ने अपनी शादी में
पाजामा सिलवाया
नाप लिया बंदर मामा ने
उन्हें पसीना आया।
बोले–‘‘इसमें तो लग जाएंगे
पूरे दो थान।‘‘
हाथी बोला–‘‘एक थान में
मामा जाओ मान।‘‘
बंदर बोला–‘‘नही–नहीं फिर
अंडरवियर सिलाओ
उसे पहनकर धूम–धाम से
ब्याह रचाने जाओ।”

1. बंदर मामा धम्म धडाम

नवीन चतुर्वेदी

बंदर कूदा डाली–डाली
मारी एक छलांग
नीचे से गदहा चिल्लाया
मामा मेरा सलाम,
बंदर मामा ने सलाम को
ज्यों ही हाथ उठाया
फिसला पैर , गिरे धरती पर
सीधे धम्म धडाम।

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Sunday, September 16, 2007

शृंगार है हिन्दी



रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’


खुसरो के हृदय का उद्गार है हिन्दी ।
कबीर के दोहों का संसार है हिन्दी ।।

मीरा के मन की पीर बन गूँजती घर- -घर ।

सूर के सागर- सा विस्तार है हिन्दी ।।

जन-जन के मानस में ,बस गई जो गहरे तक ।
तुलसी के 'मानस' का विस्तार है हिन्दी ।।

दादू और रैदास ने गाया है झूमकर ।
छू गई है मन के सभी तार है हिन्दी ।।

'सत्यार्थप्रकाश' बन अँधेरा मिटा दिया ।

टंकारा के दयानन्द की टंकार है हिन्दी ।।

गाँधी की वाणी बन भारत जगा दिया ।
आज़ादी के गीतों की ललकार है हिन्दी ।।

'कामायनी' का 'उर्वशी’ का रूप है इसमें ।
'आँसू’ की करुण ,,सहज जलधार है हिन्दी ।।

प्रसाद ने हिमाद्रि से ऊँचा उठा दिया।
निराला की वीणा वादिनी झंकार है हिन्दी।।

पीड़ित की पीर घुलकर यह 'गोदान' बन गई ।
भारत का है गौरव , शृंगार है हिन्दी ।।

'मधुशाला' की मधुरता है इसमें घुली हुई ।
दिनकर के 'द्वापर' की हुंकार है हिन्दी ।।

भारत को समझना है तो जानिए इसको ।

दुनिया भर में पा रही विस्तार है हिन्दी ।।

सबके दिलों को जोड़ने का काम कर रही ।
देश का स्वाभिमान है ,आधार है हिन्दी ।।
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